------------------------------------------------------- ------------------------------------------------ On 138th Foundation Day of Congress, Congress said we are ready to fight against dictatorship #कांग्रेस का 138 वां स्थापना दिवस कांग्रेस ने कहा हैं तैयार हम

On 138th Foundation Day of Congress, Congress said we are ready to fight against dictatorship #कांग्रेस का 138 वां स्थापना दिवस कांग्रेस ने कहा हैं तैयार हम

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138th Foundation Day of Congress, Congress said we are ready to fight against dictatorship |कांग्रेस का 138 वां स्थापना दिवस


१) सालों  तक आरएसएस ने तिरंगा नहीं फहराया

 २)  देश में आज दो विचारधारा की लड़ाई है 

३)  केंद्र में बैठे हुए सरकार की विचारधारा,सोच राजा महाराजाओं की तरह है 

४)  देश की लगाम जनता के हाथ में होनी चाहिए यह भी राहुल गांधी ने कहा.


Congress के नेता नाना पटोले ने कहा



है तैयार हम अहंकारी सरकार हटाने के लिए ,हम तैयार हैं महंगाई मजदूर उनके विरोध में जो मोहिम  केंद्र में बैठी सरकार ने शुरू की है और आज कांग्रेस का 138 स्थापना वां दिन है. कांग्रेस स्थापना हुई थी उसके पीछे भी एक मकसद था उस समय की तानाशाह सरकार अंग्रेजों की अपने देश में थी. और उसको  हटाने का संकल्प कांग्रेस ने उस समय लिया था और आज भी हम लोग तांत्रिक व्यवस्था में तानाशाह सरकार केंद्र में जो बैठी है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को संवैधानिक व्यवस्था को  खत्म कर रही है और  इसलिए नागपुर में रैली होने जा रही है


नागपुर रैली: विपक्ष का बड़ा जुटान

इसी संकल्प के तहत, कांग्रेस नागपुर में एक बड़ी रैली आयोजित करने जा रही है। नागपुर का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आरएसएस का मुख्यालय होने के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाता है। इस रैली का उद्देश्य न केवल सरकार के खिलाफ जनता को जागरूक करना है, बल्कि यह दिखाना भी है कि विपक्ष अब एकजुट होकर सत्ता के दमनकारी रवैये के खिलाफ खड़ा हो रहा है।

कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है, मीडिया और न्यायपालिका पर दबाव बना रही है, और विरोधियों को डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह की नीतियां जारी रहीं, तो देश का संविधान खतरे में पड़ सकता है।

क्या सच में देश में तानाशाही की ओर झुकाव हो रहा है?

यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या भारत वास्तव में एक "तानाशाही व्यवस्था" की ओर बढ़ रहा है? सरकार के समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ विपक्ष का प्रोपेगैंडा है और देश में लोकतंत्र मजबूत है। लेकिन विपक्षी दलों और कई स्वतंत्र विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में संस्थानों की स्वायत्तता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध का अधिकार सीमित हुआ है।

  • मीडिया पर नियंत्रण: कई पत्रकारों और मीडिया हाउसेस पर सरकार के समर्थन में खबरें चलाने का दबाव बनाया जा रहा है।

  • न्यायपालिका में हस्तक्षेप: जजों की नियुक्ति और महत्वपूर्ण मामलों में सरकार का प्रभाव बढ़ने के आरोप लगते रहे हैं।

  • विरोधी आवाज़ों को दबाना: सरकार के आलोचकों के खिलाफ एनआईए, ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या कांग्रेस जनता का विश्वास जीत पाएगी?

कांग्रेस ने अपने 138 साल के इतिहास में कई बार देश का नेतृत्व किया है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी लोकप्रियता कम हुई है। अब वह खुद को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वह जनता का भरोसा वापस पा सकती है?

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि वे "अहंकारी सरकार" के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा करेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें न केवल एक मजबूत रणनीति बनानी होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करके लोगों के बीच पहुंच भी बढ़ानी होगी।

यह स्पष्ट है कि भारतीय राजनीति में दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच एक बड़ा संघर्ष चल रहा है। एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, भले ही उसके लिए कुछ स्वतंत्रताएं सीमित करनी पड़ें। वहीं दूसरी ओर वे हैं जो मानते हैं कि लोकतंत्र का मतलब जनता की आवाज़ सुनना है, न कि सत्ता का केंद्रीकरण करना।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस और विपक्षी दल सत्ता के खिलाफ एक सशक्त मोर्चा बना पाते हैं या फिर मौजूदा सरकार अपनी नीतियों से देश की दिशा तय करती रहेगी। एक बात तय है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी, न कि दबाई जाएगी।





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